उत्तराखंड: कुर्सी के सहारे 8 किमी पैदल चलकर गर्भवती महिला को पहुंचाया सड़क तक

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उत्तराखंड: कुर्सी के सहारे 8 किमी पैदल चलकर गर्भवती महिला को पहुंचाया सड़क तक

उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे चल रही है। पहाड़ी जिलों के दूरस्थ गांवों में सड़क और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली किस प्रकार है इसके उदाहरण सामने आते रहते हैं। ताजा मामला चमोली जनपद के निजमुला घाटी का है जहां ईराणी गांव में सड़क नहीं होने से कुर्सी के सहारे 8 किलोमीटर पैदल चलकर गर्भवती महिला को किसी तरह सड़क तक पहुंचाया। जहां से निजी वाहन के माध्यम से महिला को जिला चिकित्सालय गोपेश्वर पहुंचाया गया।

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एक तरफ पर्वतीय जनपदों में पलायन की मार दूसरी तरफ मूलभूत सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। रोजगार, शिक्षा की तलाश में पहाड़ से युवा दूसरे राज्यों व विदेशों की तरफ रुख करते हैं। ऐसे में गांव में सड़क नहीं होने पर बीमार/गर्भवती महिलाओं को अस्पताल पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं है। भले ही सरकार दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य और सड़क सुविधाएं के दावे करती है लेकिन आज भी कई क्षेत्र ऐसे हैं जहां के लोगों के लिए गांव में सड़क पहुंचना किसी चमत्कार से कम नहीं है। यह उस प्रदेश की कहानी है जहां 22 सालों में 11 मुख्यमंत्री बन चुके हैं तो विकास कहां हो रहा यह किसी से छिपा नहीं है।

सड़क के अभाव में गर्भवती महिला को ग्रामीणों ने कुर्सी के सहारे 8 किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचाया और यह कहानी है चमोली जिले के निजमुला घाटी के ईराणी गांव की, जहां मंगलवार रात को मीना देवी पत्नी देव‌ सिंह की प्रसव पीड़ा हुई। गांव में सड़क की व्यवस्था नहीं होने पर बुधवार सुबह ग्रामीणों ने कुर्सी पर लकड़ी के डंडे बांधकर गर्भवती महिला को बिठाकर 8 किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचाया। जिसके बाद निजी वाहन से महिला को जिला अस्पताल गोपेश्वर पहुंचाया गया।