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भारत-यूके एफटीए: अप्रैल 2026 में सौदे की उम्मीद, आर्थिक रिश्तों में नया अध्याय!

Published On: February 16, 2026 4:03 AM

HIGHLIGHTS

  • अप्रैल 2026 तक डील फाइनल: व्यापार 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचेगा, भारतीय निर्यात को बूस्ट!
  • किसानों की सुरक्षा प्राथमिकता: सरकार के सेफगार्ड्स से कृषि क्षेत्र सुरक्षित, विपक्ष उठा रहा सवाल!
  • वैश्विक ताकत बढ़ेगी: मोदी की सुधारों से इंडो-पैसिफिक में नया सहयोग, निवेश की बाढ़ आएगी!

नई दिल्ली, 16 फरवरी 2026: क्या आप जानते हैं कि भारत और ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) जल्द ही हकीकत बन सकता है? अधिकारियों के मुताबिक, यह ऐतिहासिक सौदा अप्रैल 2026 तक फाइनल हो सकता है, जो दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। यह खबर ऐसे समय में आई है जब वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताएं बढ़ रही हैं, लेकिन भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ नीति और ब्रिटेन की पोस्ट-ब्रेक्सिट रणनीति इसे एक परफेक्ट मैच बना रही हैं। आइए जानते हैं, यह डील क्यों इतनी खास है और कैसे यह आम आदमी की जेब को प्रभावित करेगी!

पिछले कुछ सालों से भारत और यूके के बीच एफटीए पर बातचीत चल रही है। ब्रिटेन के साथ यह समझौता भारत का पहला बड़ा यूरोपीय डील होगा, जो ऑटोमोबाइल, फार्मास्यूटिकल्स, आईटी सर्विसेज और कृषि उत्पादों जैसे क्षेत्रों में टैरिफ बैरियर्स को कम करेगा। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, “हमारी टीमों ने कई राउंड की चर्चा के बाद प्रमुख मुद्दों पर सहमति बना ली है। अप्रैल तक फाइनल साइनिंग की उम्मीद है, जो दोनों देशों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।” क्यों है यह डील इतनी रोमांचक? सबसे पहले, आर्थिक फायदे: अनुमान है कि यह समझौता द्विपक्षीय व्यापार को मौजूदा 50 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर 100 बिलियन डॉलर तक पहुंचा सकता है।

भारतीय निर्यातकों के लिए ब्रिटेन का बाजार और खुल जाएगा, जहां चाय, मसाले, टेक्सटाइल और सॉफ्टवेयर जैसे उत्पादों की मांग पहले से ही ऊंची है। वहीं, ब्रिटेन से भारत को उन्नत टेक्नोलॉजी, व्हिस्की और लग्जरी कारों पर कम टैक्स का फायदा मिलेगा। लेकिन क्या यह सिर्फ बड़े बिजनेस के लिए है? नहीं! आम उपभोक्ताओं के लिए सस्ते आयात का मतलब है कि बाजार में ज्यादा विकल्प और कम कीमतें। उदाहरण के लिए, अगर आप एक नई इलेक्ट्रिक कार खरीदने की सोच रहे हैं, तो ब्रिटिश ब्रांड्स अब ज्यादा किफायती हो सकते हैं।

हालांकि, चुनौतियां भी हैं। विपक्षी नेता राहुल गांधी ने इस डील पर सवाल उठाते हुए कहा, “किसानों के हितों की रक्षा होनी चाहिए। हमें सुनिश्चित करना होगा कि यह समझौता भारतीय कृषि को नुकसान न पहुंचाए।” सरकार ने जवाब में कहा कि डील में संवेदनशील क्षेत्रों जैसे डेयरी और कृषि के लिए सेफगार्ड्स शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एफटीए भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करेगा, खासकर जब अमेरिका के साथ हालिया ट्रेड पैक्ट्स से हम ‘ताकत की स्थिति’ में हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल के एक इंटरव्यू में कहा, “हमारी सुधारों की प्राथमिकताएं संरचनात्मक बदलाव, इनोवेशन और सरल शासन पर हैं। ऐसे समझौते हमें वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाते हैं।” यह डील न केवल आर्थिक है, बल्कि रणनीतिक भी – इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का एक हिस्सा।क्या यह डील समय पर होगी? ब्रिटेन में राजनीतिक स्थिरता और भारत की बजट प्राथमिकताएं (जैसे 18 बिलियन डॉलर का इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश) इसे सपोर्ट कर रही हैं। अगर सब ठीक रहा, तो अप्रैल 2026 में हम एक नई शुरुआत देखेंगे। क्या आप तैयार हैं इस आर्थिक क्रांति के लिए? कमेंट्स में बताएं, और ज्यादा अपडेट्स के लिए हिंदू लाइव को फॉलो करें!

(यह लेख हिंदू लाइव की विशेष रिपोर्ट है, जो वर्तमान घटनाक्रमों पर आधारित है। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों से संपर्क करें।)

Editorial Team

This article was edited by hindulive.com editorial team.

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